
चौपारण। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 स्थित दनुआ घाटी में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 12 घंटे के दौरान घाटी में दर्जनों वाहन आपस में टकरा गए, जिससे कई बार यातायात बाधित हुआ और लंबा जाम लग गया। जाम हटाने तथा यातायात सामान्य करने में चौपारण पुलिस को घंटों कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि राहत की बात यह रही कि इन दुर्घटनाओं में कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं, जबकि कई वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारण दनुआ घाटी चौपारण पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। पुलिस का अधिकांश समय घाटी में दुर्घटनाओं और जाम से निपटने में बीत रहा है, जिससे अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियां भी प्रभावित हो रही हैं।
घटनाओं के बाद एक बार फिर एनएचएआई की तैयारियों और रेड टेप सहित सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दनुआ घाटी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अब तक एनएचएआई की ओर से स्थायी रूप से क्रेन, एंबुलेंस और जेसीबी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। दुर्घटना होने पर वाहन मालिकों को बाजार से निजी क्रेन, जेसीबी मंगवानी पड़ती है, जिसके लिए उन्हें मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से जनप्रतिनिधि, एनएचएआई और संबंधित उच्च अधिकारी घाटी की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के केवल आश्वासन देते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों ने घाटी में तत्काल राहत एवं बचाव संसाधनों की स्थायी तैनाती, सड़क सुरक्षा उपायों को मजबूत करने तथा दुर्घटनाओं क़ो रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। लगातार हो रहे हादसों ने एक बार फिर दनुआ घाटी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।













